एनडीए मंत्रीमंडल में केवल एक ही सहयोगी मंत्री, बिहार चुनाव के बाद हो सकता है केंद्रीय मंत्रीमंडल में विस्तार, अकाली दल, शिव सेना और लोजपा का प्रतिनिधित्व खत्म, केवल आरपीआई ही बची

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एनडीए मंत्रीमंडल में केवल एक ही सहयोगी मंत्री

बिहार चुनाव के बाद हो सकता है केंद्रीय मंत्रीमंडल में विस्तार

अकाली दल, शिव सेना और लोजपा का प्रतिनिधित्व खत्म, केवल आरपीआई ही बची

लुधियाना (राजकुमार साथी) केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन के बाद मोदी मंत्रिमंडल से सहयोगी पार्टियों का प्रतिनिधित्व खत्म हो गया है। अब केवल रामदास अठावले की पार्टी आरपीआई ही केंद्रीय मंत्रीमंडल में बची है। जबकि शिव सेना, अकाली दल और लोजपा की भागीदारी खत्म हो गई है। इसी वजह से बिहार चुनाव के बाद मोदी मंत्री मंडल के विस्तार की अटकलें लगने लगी हैं।

बताते चलें कि मोदी सरकार ने अपनी दूसरी पारी में टीम को छोटा करते हुए 57 सदस्यों रखे थे। शिवसेना कोटे के केंद्रीय मंत्री अरविंद सावंत और उनके बाद अकाली दल कोटे की केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने इस्तीफा दे दिया। इसी दौरान रेल राज्यमंत्री सुरेश अंगड़ी का कोरोना से निधन हो गया। इस प्रकार टीम मोदी में इस समय महज 53 सदस्य बचे हैं, जबकि पीएम अपनी टीम में 81 सदस्य रख सकते हैं। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में एनडीए का आकार छोटा हुआ है। शिवसेना, अकाली दल, आजसू समेत कुछ और छोटे दलों ने एनडीए से नाता तोड़ लिया है। वर्तमान में सहयोगी दल से आरपीआई के रामदास अठावले ही बतौर राज्य मंत्री टीम मोदी में शामिल हैं। टीम में कम मंत्री होने के कारण कई मंत्रियों पर काम का बोझ बेहद ज्यादा है। पीयूष गोयल, नरेंद्र सिंह तोमर, निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, धर्मेंद्र प्रधान एक से अधिक मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पासवान के निधन के बाद उपभोक्ता मामले की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे पीयूष गोयल के पास रेलवे और वाणिज्य दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी पहले से ही है। बदली परिस्थितियों में पीएम बिहार चुनाव के बाद पासवान की जगह उनके पुत्र चिराग को मंत्रिमंडल में जगह देने पर विचार कर रहे हैं।

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