नीतीश कुमार : दो बार मिली हार तो छोडऩा चाहते थे राजनीति, किस्मत ने बनाया दिया इतना बड़ा पॉलिटिशयन

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नीतीश कुमार : दो बार मिली हार तो छोडऩा चाहते थे राजनीति

किस्मत ने बनाया दिया इतना बड़ा पॉलिटिशयन

पटना। बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाने वाले नीतीश कुमार जब अपने राजनीति काल के शुरू में पहले दो चुनाव लगातार हारे तो उन्होंने राजनीति छोड़ ठेकेदार बनने की सोची। लेकिन जब तीसरे चुनाव में उन्हें जीत मिली तो वे बड़े पॉटिशियन बनकर उभर आए। उन्होंने 1995 में आखिरी बार विधानसभा और 2004 में आखिरी लोकसभा चुनाव लड़ा। इसके बाद से उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा। नीतीश कुमार को 1973 में जिस नेता ने अपनी कार में बिठाकर घर तक छोड़ा, 26 साल की उम्र में 1977 में वे उसी के खिलाफ पहला विधानसभा का चुनाव लड़े थे। हालांकि वे इसमें हार गए थे। 1980 में वे दोबारा उसी सीट से खड़े हुए और फिर हार गए।  इस हार के बाद उन्होंने राजनीति छोड़ सरकारी ठेकेदार बनने का सोचना शुरू कर दिया। तीसरी बार 1985 में अंतिम चुनाव लडक़र किस्मत आजमाने के लिए मैदान में उतरे और जीत गए। जनता दल और जनता दल सेक्युलर की टिकटों पर हार देखने के बाद लोक दल पार्टी की टिकट पर उन्हें पहली जीत मिली। नो 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में वे छह बार लोकसभा चुनाव जीते। इसके बाद उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा। साल 2000 में वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। मगर सात दिन बाद ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उसके बाद 2005 से लेकर आज तक वे ही मुख्यमंत्री बने हुए हैं। इस बीच मई 2014 से फरवरी 2015 तक जीतन राम मांझी को सीएम बनाया गया था।

 

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