केंद्र सरकार जिद पर अड़ी, सख्त होगा किसानों का आंदोलन
किसानों ने टोल प्लाजा फ्री करने, दिल्ली–जयपुर हाई–वे बंद करने की तैयारी की
लुधियाना (राजकुमार साथी)। केंद्र सरकार की ओर से पारित किए गए तीन नए खेती बिलों को रद्द कराने के लिए ढाई महीने से आंदोलनरत किसानों ने आंदोलन को सख्त करने की चेतावनी दी है। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने टोल प्लाजा फ्री करने की बात कही है। शनिवार को भारतीय किसान यूनियन ने गौतमबुद्धनगर में पेरीफेरल एक्सप्रेसवे के सिरसा टोल को टोल फ्री करा दिया है। किसान दिल्ली–जयपुर और दिल्ली–आगरा हाईवे भी जाम करके टोल फ्री करा रहे हैं। दिल्ली से सटे हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर हजारों किसान जमा हैं। उधर, दिल्ली–यूपी और हरियाणा सीमा पर पहले से तैनात पुलिसकर्मी व जवानों के अलावा पुलिस फोर्स के साथ 80 टीमों को लगाया गया है। तीनों कृषि कानूनों को रद करने की मांग पर अड़े आंदोलनरत किसानों का कहना है कि उनका आंदोलन गैर राजनीतिक है। इससे किसी राजनीतिक पार्टी का कोई लेना–देना नहीं है।
सिंघु बॉर्डर और कुंडली बॉर्डर पर भी किसानों का धरना जारी रहा। कानून वापसी के लिए किसान यूनियन के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि शनिवार को टोल फ्री और जयपुर हाईवे हर हाल में बंद कराएंगे। रेल रोकने की अभी कोई योजना नहीं है। सरकार से वार्ता के दरवाजे खुले हैं, निमंत्रण आया तो बात जरूर करेंगे। कुंडली बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में कोरोना की शुरुआत हो गई है। यहां दो आईपीएस अफसर कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इसमें आउटर डीसीपी गौरव और एडिशनल डीसीपी घनश्याम बंसल संक्रमित पाए गए हैं। दोनों को होम आइसोलेशन में रखा गया है। नए कृषि कानूनो के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में राजद सांसद मनोज झा, द्रमुक राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा और छत्तीसगढ़ किसान कांग्रेस के राकेश वैष्णव ने याचिका दायर की थी। किसानों ने इन्हीं के आधार पर लंबित याचिका दायर की है। इसमें कहा है कि केंद्र्रीय कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020, कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत अश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, 2020 और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक, 2020 को रद्द कर दिया जाए। ये अवैध और मनमाने हैं। इनसे व्यावसायीकरण और गुटबंदी के लिए मार्ग प्रशस्त होगा। किसानों को कॉर्पोरेट की दया पर रखा जा रहा है। मामले में पुरानी याचिकाओं को सुना जाए। इनमें कहा गया है कि नए कानून देश के कृषि क्षेत्र को निजीकरण की ओर धकेल देंगे। ये कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएमसी) प्रणाली को खत्म करेंगे, जिसका उद्देश्य उत्पादों के उचित मूल्य सुनिश्चित करना है। ये कानून जल्दबाजी में पारित किए गए हैं। किसान वास्तव में डर रहे हैं कि वे कॉर्पोरेट घरानो के भरोसे ही रह जाएंगे। अमृतसर से प्रदर्शन के लिए 30 हजार किसानों का एक दल दिल्ली के लिए रवाना हुआ। किसान मजदूर संघर्ष समिति से जुड़े ये लोग अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, जालंधर, कपूरथला और मोगा जिलों के हैं। कुंडली बॉर्डर पर अब तक सैकड़ों किसान बुखार और खांसी की दवा ले चुके हैं। लेकिन कई बार की गुजारिश के बाद भी किसान कोरोना जांच से बच रहे हैं। बॉर्डर पर भले ही मेडिकल कैंप हैं, पर कोरोना के मद्देनजर स्क्रीनिंग/टेस्टिंग नहीं हो रही। ऐसे में कोरोना का खतरा लगातार बढऱहा है। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल की तबीयत पिछले दिनों खराब हुई थी, जिसके बाद उनके परिजन उनसे मिलने पहुंचे। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने कोरोना का खतरा बताते हुए प्रदर्शनकारियों पर महामारी एक्ट व अन्य धाराओं में केस भी दर्ज किया था। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने उनकी तरफ बैठे किसानों की कोरोना जांच शुरू कर दी है। प्रतिदिन 200 टेस्ट का लक्ष्य रखा है। शुक्रवार को 23 टेस्ट हुए और सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई।